Sunday, February 22, 2015

सारदा चिटफंड घोटाले में फंसे मदन मित्रा के बचाव में तृण'मूलियों' ने जमकर बवाल काटा ....सड़क पर संग्राम के बाद ममता ने अपने करीबी मंत्री के बचाव के लिए संसद में भी हंगामा करने की चेतावनी दी...धन्य है ऊँची दुकान और फीके पकवान वाले 'दुकानदारो'...बंगाल में भले ही बेरोजगारी भुखमरी  से लोग दम तोड़ रहे हो...लेकिन उन पर ममता की ममता इस इस कदर कभी नहीं बरसी...जिस कदर ममता अपने मंत्री मदन मित्रा के जेल जाने  के जेल जाने के  बाद बरसी ....ये हमारा राजनैतिक नंगापन है ...या वैचारिक दिवालियापन ये मैं नहीं जनता...लेकिन इतना जरूर जानना चाहता हूँ कि...जब भी नेताओं पर कार्रवाई की आंच पहुंचती है तो उन्हें आंदोलन विरोध प्रदर्शन और गांधी की आत्मा भी जाग उठती है...आम आदमी के पास समस्याओं का अंबार भले लगा रहे...सत्तासुख भोगी इन नेताओ को उससे कुछ लेना देना नहीं...नेताओं के पास कौन सी जादू की छड़ी...या फार्मूला है ...जिसके दम पर वो मालामाल हो रहे हैं....और जनता कंगाल....नेताओं और अफसरों की संपत्ति करोडो में बढ़ रही है...और किसानों की आत्महत्या की तादाद में इजाफा...माफ़ कीजिये इमोशनल हो गया हूँ देश के चरित्रवानों से...इसे इत्तफाक कहिये या संयोग आम आदमी भी सड़क पर है...और नेता भी...फर्क इतना एक सियासत के लिए...और दूसरा दो वक्त की रोटी का मारा....खैर छोड़िये मैं भी कहा पड़ा हूँ...शरद पवार से लेकर मनमोहन सिंह कह  चुके हैं की उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है...ऐसे में देश के कर्णधारों पर ऊँगली उठाना बदतमीजी ही होगी....माफ़ कीजिये शाइनिंग इंडिया के वो सपूत जिनका खून जल्द उबाल मरता है...

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